ऐसे मामले जिनका आयोग संज्ञान नही लेता है

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1. जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति बनाम अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हों।
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2. गैर अनुसूचित जाति और गैर अनुसूचित जनजाति से सम्बन्धित प्राप्त ऐसे प्रार्थना पत्र जिनका सम्बन्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उत्पीड़न से न हो।
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3.ऐसे प्रकरण जो मुख्यतः राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हों या जिनका संज्ञान उक्त आयोग द्वारा ले लिया गया हो।
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4. जो किसी न्यायालय में विचाराधीन हो।
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5. जो प्रार्थना पत्र देने की तिथि से पांच वर्ष से अधिक पुराने हों।
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6. सेवा सम्बन्धी मामले जो सरकारी सेवक द्वारा स्वयं न देकर किसी अन्य सम्बन्धी या व्यक्ति के नाम से दिये गये हो, जो उत्तर प्रदेष सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के अनुसार न हों।
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7. सेवा सम्बन्धी ऐसे मामले जिनमें उपलब्ध विभागीय प्रतिकार न लिया गया हो सिवाय उन मामलों के जिनमें आयोग को यह लगे कि सुसंगत नियमों का सक्षम स्तर पर अनुपालन न किया जा रहा हो।
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8. ऐसे मामले जिनका आयोग द्वारा पहले ही संज्ञान लिया जा चुका हो।
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9. लाइसेंस, परमिट, आवास एवं अनुदान आदि दिलाये जाने सम्बन्धी अनुरोध या संस्तुति करने विषयक मामले सिवाय उन मामलों के जिनमें नियम उल्लंघन आदि के कारण न्याय न मिल रहा हो।
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10. श्रमिक संगठनों/यूनियनों/एसोसिएशनों से प्राप्त संदर्भ जो नीति विषयक न होकर व्यक्ति विशेष की शिकायत से सम्बन्धित हों जिसमें उस व्यक्ति को आयोग को सीधे अनुरोध करने का अवसर प्राप्त हो।
 

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